नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने निर्माण श्रमिक परिवारों के बच्चों की शिक्षा को मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप...
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने निर्माण श्रमिक परिवारों के बच्चों की शिक्षा को मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को आयोजित एक कार्यक्रम में 15,000 से अधिक पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए कुल ₹12.40 करोड़ से अधिक की छात्रवृत्ति सहायता राशि जारी की। यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी गई।
सरकार का कहना है कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर श्रमिक परिवारों के बच्चों को पढ़ाई जारी रखने में सहायता देना और ड्रॉपआउट दर को कम करना है। निर्माण श्रमिकों के परिवार अक्सर अस्थिर आय और सीमित संसाधनों के कारण बच्चों की शिक्षा पर पर्याप्त खर्च नहीं कर पाते। ऐसे में यह आर्थिक सहयोग उनके लिए राहत का काम करेगा।
योजना के तहत अलग-अलग कक्षाओं और पाठ्यक्रमों के अनुसार मासिक सहायता निर्धारित की गई है। प्राथमिक कक्षाओं से लेकर उच्च शिक्षा और तकनीकी/पेशेवर कोर्स तक के छात्रों को लाभ दिया जा रहा है। सरकार के अनुसार, इस पहल से हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा और बच्चों को बेहतर शैक्षणिक अवसर प्राप्त होंगे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली का विकास श्रमिकों की मेहनत से संभव हुआ है, इसलिए उनके बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि श्रमिक कल्याण से जुड़ी अन्य योजनाओं को भी आगे बढ़ाया जाएगा।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की लक्षित सहायता योजनाएं सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देती हैं और कमजोर वर्गों के बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने में प्रभावी भूमिका निभाती हैं।
सरकार ने पात्र श्रमिकों से अपील की है कि वे श्रम विभाग में पंजीकरण सुनिश्चित करें ताकि भविष्य की योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके।
यह पहल न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करती है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि श्रमिक परिवारों के बच्चों की शिक्षा और भविष्य सरकार की प्राथमिकता में शामिल है।
