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मध्य प्रदेश में प्राकृतिक आपदा से 25 जिलों में फसलें बर्बाद, राहत के लिए सरकार सक्रिय

भोपाल | 23 फरवरी 2026 मध्य प्रदेश में अचानक बदले मौसम ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। बीते दिनों हुई तेज बारिश, ओलावृष्टि और आंधी ...

भोपाल | 23 फरवरी 2026

मध्य प्रदेश में अचानक बदले मौसम ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। बीते दिनों हुई तेज बारिश, ओलावृष्टि और आंधी ने राज्य के लगभग 25 जिलों में रबी फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचाया है। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार गेहूं, चना, मसूर और सरसों की खड़ी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

कटाई से ठीक पहले आई इस प्राकृतिक आपदा ने किसानों की आर्थिक स्थिति को गंभीर संकट में डाल दिया है। कई क्षेत्रों में खेतों में पानी भर गया, जबकि ओलों की मार से फसलें जमीन पर गिर गईं।


किन क्षेत्रों में अधिक असर?

जानकारी के अनुसार मालवा, नर्मदापुरम और बुंदेलखंड संभाग के कई जिलों में सबसे अधिक नुकसान दर्ज किया गया है। कृषि विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट में हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में फसल प्रभावित होने का अनुमान जताया गया है।

ग्रामीण इलाकों से मिली तस्वीरों और वीडियो में साफ दिख रहा है कि खेतों में खड़ी गेहूं और चने की फसल बिछ चुकी है। किसानों का कहना है कि यदि मौसम सामान्य रहता तो कुछ ही दिनों में कटाई शुरू हो जाती।


मुख्यमंत्री के निर्देश

राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी कलेक्टरों को तत्काल सर्वे कर वास्तविक नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि:

  • प्रत्येक प्रभावित गांव में राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम सर्वे करेगी।
  • जिन किसानों की फसल पूरी तरह नष्ट हुई है, उन्हें प्राथमिकता से राहत दी जाएगी।
  • फसल बीमा योजना के तहत दावों का शीघ्र निपटान सुनिश्चित किया जाएगा।
  • आवश्यक होने पर राज्य आपदा राहत कोष से अतिरिक्त सहायता दी जाएगी।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राहत वितरण में पारदर्शिता रखी जाए और किसानों को अनावश्यक प्रक्रिया में न उलझाया जाए।


किसानों की मांग और चिंता

प्रभावित किसानों का कहना है कि उन्होंने बीज, खाद और सिंचाई पर भारी खर्च किया था। कई किसानों ने बैंक या निजी स्रोतों से कर्ज लेकर खेती की थी। ऐसे में फसल बर्बादी ने उनकी आर्थिक स्थिति को और कठिन बना दिया है।

किसानों की प्रमुख मांगें हैं:

  • शीघ्र सर्वे और वास्तविक नुकसान का सही आकलन
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के आधार पर पर्याप्त मुआवज़ा
  • फसल बीमा क्लेम की त्वरित स्वीकृति
  • कृषि ऋण पर ब्याज में राहत

राज्य सरकार द्वारा सर्वे रिपोर्ट आने के बाद ही कुल नुकसान का स्पष्ट आंकड़ा सामने आएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसे असामान्य मौसम की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे खेती की अनिश्चितता भी बढ़ी है।

अब देखना यह होगा कि राहत प्रक्रिया कितनी तेजी और प्रभावशीलता से लागू होती है। किसानों को उम्मीद है कि सरकार समय रहते सहायता प्रदान करेगी ताकि वे अगली फसल के लिए तैयार हो सकें।