5 मार्च 2026 में बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। लंबे समय तक राज्य की राजनीति के केंद्र में रहे मुख्यमंत्री नीतीश ...
सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। इस कदम को लेकर राजनीतिक दलों और विश्लेषकों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
विपक्षी दलों, विशेषकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने इस फैसले को लेकर कड़ी आलोचना की है। राजद नेताओं का कहना है कि नीतीश कुमार ने यह कदम उठाकर भाजपा के सामने “राजनीतिक सरेंडर” कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि इस फैसले से बिहार की सत्ता पर भाजपा का प्रभाव और मजबूत हो जाएगा।
राजद का यह भी कहना है कि लंबे समय तक गठबंधन बदलते रहने के बाद अब नीतीश कुमार ने आखिरकार पूरी तरह भाजपा के साथ खड़े होने का फैसला कर लिया है।
नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार की राजनीति में नए सत्ता समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी किसे मिलती है और राज्य की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना केवल एक व्यक्तिगत राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी नए संकेत दे सकता है। इससे आने वाले समय में बिहार और केंद्र की राजनीति पर भी असर पड़ सकता है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बिहार में नया मुख्यमंत्री कौन बनेगा और आगामी चुनावों में इस फैसले का क्या प्रभाव पड़ेगा। फिलहाल, नीतीश कुमार के इस कदम ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस और राजनीतिक हलचल जरूर पैदा कर दी है।
