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भारतीय ओलंपिक संघ की बड़ी कार्रवाई: कराटे प्रशासन में पारदर्शिता और वैधानिक मान्यता सुनिश्चित करने की पहल

नई दिल्ली, 1 जून 2026। भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) ने देश में कराटे खेल के प्रशासन, खिलाड़ियों के हितों और खेल शासन व्यवस्था में पारदर्शिता सुन...

नई दिल्ली, 1 जून 2026।

भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) ने देश में कराटे खेल के प्रशासन, खिलाड़ियों के हितों और खेल शासन व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्र सरकार तथा संबंधित संस्थाओं को दो महत्वपूर्ण पत्र जारी किए हैं। इन पत्रों में कराटे से संबंधित गैर-मान्यता प्राप्त संस्थाओं की गतिविधियों, राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के आयोजन तथा “India” शब्द के उपयोग को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की गई हैं।

भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद डॉ. पी. टी. उषा द्वारा जारी पत्रों में कहा गया है कि वर्तमान में भारत में कराटे के लिए कोई भी संस्था राष्ट्रीय खेल विकास संहिता (National Sports Development Code of India, 2011) के तहत मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय खेल महासंघ (NSF) के रूप में मान्य नहीं है। इसके बावजूद विभिन्न संस्थाएं राष्ट्रीय स्तर की मान्यता का दावा करते हुए प्रतियोगिताओं, चयन ट्रायल्स तथा अन्य गतिविधियों का संचालन कर रही हैं।

IOA ने 11 मार्च 2026 को खेल मंत्रालय को भेजे गए पत्र में आग्रह किया कि ऐसी गैर-मान्यता प्राप्त संस्थाओं के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई पर विचार किया जाए, जो स्वयं को राष्ट्रीय शासी निकाय के रूप में प्रस्तुत कर खिलाड़ियों, अभिभावकों, प्रायोजकों और राज्य इकाइयों को भ्रमित कर सकती हैं। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि ऐसी संस्थाओं द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं और चयन प्रक्रियाओं से खिलाड़ियों की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पात्रता प्रभावित हो सकती है।

इसके अतिरिक्त, 1 जून 2026 को जारी एक अन्य पत्र में भारतीय ओलंपिक संघ ने Karate India Organisation (KIO) को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 (National Sports Governance Act, 2025) के प्रावधानों के अनुसार “India”, “Indian” अथवा “National” जैसे राष्ट्रीय पहचान वाले शब्दों का उपयोग निर्धारित वैधानिक अनुमतियों के बिना नहीं किया जा सकता।

IOA के अनुसार KIO न तो भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय खेल महासंघ है और न ही भारतीय ओलंपिक संघ का सदस्य संगठन। पत्र में यह भी कहा गया कि KIO द्वारा प्रस्तावित राष्ट्रीय चैंपियनशिप तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए खिलाड़ियों के चयन संबंधी गतिविधियां वैधानिक अधिकार के अभाव में प्रश्नों के घेरे में हैं।

भारतीय ओलंपिक संघ ने स्पष्ट किया कि खेल प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और खिलाड़ियों के हित सर्वोपरि हैं। गैर-मान्यता प्राप्त संस्थाओं द्वारा जारी प्रमाणपत्र, पदक और उपलब्धियां सरकारी योजनाओं अथवा खेल संबंधी लाभों के लिए मान्य नहीं हो सकतीं, जिससे खिलाड़ियों को भविष्य में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

इन दोनों पत्रों के माध्यम से IOA ने केंद्र सरकार, खेल मंत्रालय तथा संबंधित प्राधिकरणों से अनुरोध किया है कि कराटे खेल के प्रशासन को राष्ट्रीय खेल विकास संहिता, 2011 तथा राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 के अनुरूप व्यवस्थित किया जाए और एक वैधानिक, पारदर्शी तथा पूर्णतः अनुपालक राष्ट्रीय खेल महासंघ के गठन का मार्ग प्रशस्त किया जाए।

खेल विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय ओलंपिक संघ की यह पहल देश में खेल शासन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, खिलाड़ियों के हितों की रक्षा करने तथा खेल संगठनों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।